PGT A, PGT M और PGT SR अंतर को समझें

PGT-A, PGT-M और PGT-SR: अंतर को समझें

प्रीइम्प्लांटेशन जेने टक टेिस्टंग (PGT) का परचय

PGT एक उन्नत डायग्नोिस्टक प्रक्रया है, जो IVF के दौरान की जाती है, िजसमें भ्रूण को गभाशय में स्थानांतरत करने से पहले आनुवंशक वकारों की जांच की जाती है। आनुवंशक समस्याओं की पहले पहचान करके, PGT इम्प्लांटेशन की सफलता बढ़ाता है, गभपात के जोखम को कम करता है और स्वस्थ गभधारण की संभावनाओं में सुधार करता है। िजस प्रकार के आनुवंशक वकार की जांच की जाती है, उसके आधार पर PGT को आगे PGT-A, PGT-M और PGT-SR में वगकृत कया जाता है, िजनका उपयोग प्रजनन उपचार में अलग-अलग उद्देश्यों के लए कया जाता है।

PGT-A: क्रोमोसोम की संख्या में असामान्यताओं की जांच

PGT-A एक ऐसी तकनीक है जो यह जांचती है क भ्रूण में क्रोमोसोम की संख्या सामान्य है या नहीं, यानी कुल 46 क्रोमोसोम हैं या नहीं। कसी एक क्रोमोसोम की कमी या अधकता के कारण इम्प्लांटेशन में समस्या, गभपात और डाउन संड्रोम जैसी असामान्यताएं हो सकती हैं।

PGT-A के परणाम वशेष रूप से 35 वष से अधक आयु की महलाओं, बार-बार गभपात के मामलों और बार-बार IVF असफल होने की िस्थत में उपयोगी होते हैं। क्रोमोसोमली सामान्य भ्रूण का चयन करके, PGT-A सफल इम्प्लांटेशन की संभावना बढ़ाता है और असफल चक्रों से होने वाले भावनात्मक व शारीरक तनाव को कम करता है।

PGT-M: वंशानुगत संगल-जीन वकारों की पहचान

PGT-M या प्रीइम्प्लांटेशन जेने टक टेिस्टंग फॉर मोनोजेनक डसऑडस तब की जाती है जब कसी वशेष आनुवंशक बीमारी के आगे बढ़ने का ज्ञात जोखम हो। यह जांच उन संगल-जीन म्यूटेशन से प्रभावत भ्रूणों की पहचान करती है, जो थैलेसीमया, सकल सेल एनीमया, सिस्टक फाइब्रोसस, मस्कुलर डस्ट्रॉफी और हीमोफीलया जैसी बीमारयों का कारण बनते हैं।

िजन दंपतयों में आनुवंशक बीमारी के कैरयर होने या पारवारक इतहास होने की संभावना होती है, उनके लए PGT-M बेहद लाभकारी है, क्योंक यह पहचानी गई बीमारी से मुक्त भ्रूण का चयन करने की अनुमत देता है और इस प्रकार आने वाली पीढ़यों में गंभीर आनुवंशक रोगों के प्रसार को रोकता है।

PGT-SR: क्रोमोसोमल संरचनात्मक परवतनों की जांच

PGT-SR का अथ है प्रीइम्प्लांटेशन जेने टक टेिस्टंग फॉर स्ट्रक्चरल रअरेंजमेंट्स और यह उन मामलों में कया जाता है, जहां कसी व्यिक्त में बैलेंस्ड क्रोमोसोमल बदलाव जैसे ट्रांसलोकेशन और इनवज़न मौजूद हों। ये बदलाव वाहकों में स्वयं कसी स्वास्थ्य समस्या का कारण नहीं बनते, लेकन अक्सर आनुवंशक रूप से असंतुलत भ्रूणों की संख्या बढ़ा देते हैं, िजससे बांझपन, बार-बार गभपात या IVF की असफलता हो सकती है।

PGT-SR सामान्य संरचना वाले क्रोमोसोम के साथ भ्रूण का चयन करता है, िजससे गभधारण के परणाम बेहतर होते हैं और गभपात की दर में उल्लेखनीय कमी आती है।

सही PGT टेस्ट का चयन

PGT के लए संकेत कई कारकों पर नभर करते हैं, जैसे आयु, आनुवंशक पृष्ठभूम, दोनों भागीदारों का चकत्सा इतहास और पूव प्रजनन परणाम। हर IVF मरीज को जेने टक टेिस्टंग की आवश्यकता नहीं होती। एक फटलटी वशेषज्ञ और जेने टक काउंसलर से वस्तृत परामश के बाद ही सबसे उपयुक्त वकल्प तय कया जाता है।

नष्कष

PGT-A, PGT-M और PGT-SR फटलटी वशेषज्ञों के पास उपलब्ध सबसे प्रभावी उपकरणों में से हैं, जो व्यक्तगत IVF उपचार के माध्यम से स्वस्थ गभावस्था की संभावना बढ़ाते हैं। जहां PGT-A इम्प्लांटेशन की सफलता को बेहतर बनाता है, वहीं PGT-M आनुवंशक रोगों के संचरण को रोकता है और PGT-SR क्रोमोसोम की संरचनात्मक समस्याओं का समाधान करता है। ये तीनों जांच मलकर एक ही उद्देश्य की पूत करती हैं—सुर त और सफल गभधारण।

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